Pradhan Mantri Matritva Vandana Yojana

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

PRADHAN-MANTRI-VAYA-VANDANA-YOJANA

  •   पीएमएमवीवाई हेतु दिशा-निर्देश
    1 सितंबर, 2017 को नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के कार्यान्वयन के लिए दिशा-निर्देश जारी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 1 जनवरी, 2017 से इस योजना के संपूर्ण भारत में कार्यान्वयन की घोषणा की गई थी। इस योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों के सहयोग से महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा किया जा रहा है।
  • पीएमएमवीवाई : पृष्ठभूमि
    पूर्व में जारी ‘इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना’ (IGMSY) को ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ (PMMVY) के रूप में केंद्र सरकार द्वारा पुनः शुरू किया गया। इसे पुरानी मातृत्व लाभ कार्यक्रम के नाम से भी जाना जाता है।
    राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अनुसार, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का कार्यान्वयन 1 जनवरी, 2017 से देश के सभी जिलों में लागू किया जाना है।
  • प्रमुख बिंदु
  • इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को परिवार के पहले जीवित बच्चे के लिए 5000 रु. की नकद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके खाते में उपलब्ध कराई जानी है।
  • योग्य लाभार्थियों को संस्थागत प्रसव के बाद ‘जननी सुरक्षा योजना’ (JSY) के तहत मातृत्व लाभ के संबंध में अनुमोदित मानदंडों के अनुसार शेष नकद प्रोत्साहन राशि प्रदान किया जाना है, इस प्रकार एक महिला औसतन 6000 रु. प्राप्त करेगी।
  • गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को 5000 रु. का नकद लाभ तीन किश्तों में जारी किया जाएगा-
    (i) 1000 रु. की पहली किश्त गर्भावस्था के पंजीकरण के समय।
    (ii) 2000 रु. की दूसरी किश्त, लाभार्थी द्वारा 6 महीने की गर्भावस्था के बाद कम-से-कम एक प्रसवपूर्व जांच के उपरांत।
    (iii) 2000 रु. की तीसरी किश्त बच्चे का जन्म पंजीकृत होने और बच्चे को BCG, OPV, DPT और हेपेटाइटिस-बी अथवा इसके समतुल्य पहले टीके का चक्र शुरू होने पर।
  • पुरानी मातृत्व लाभ कार्यक्रम के तहत पंजीकृत 53 पायलट जिलों के योग्य लाभार्थी, जिन्होंने पहली किश्त नहीं प्राप्त की है, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पंजीकरण करा सकते हैं।
  • इस योजना के लिए केंद्र सरकार के मध्य 60:40 के अनुपात में वित्तपोषण किया जाना है। पूर्वोत्तर के राज्यों और हिमालयी राज्यों के लिए यह अनुपात 90 :10 का होगा।
  • पीएमएमवीवाई का कार्यान्वयन
    यह योजना केंद्रीय स्तर पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाएगी, जबकि राज्य/संघ शासित प्रदेश स्तर पर संबंधित राज्य/संघ शासित प्रदेश में इस योजना का कार्यान्वयन महिला एवं बाल विकास/समाज कल्याण विभाग अथवा स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के माध्यम से किए जाने का विकल्प होगा।
  • प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा प्रशिक्षण मॉड्यूल (Early Childhood Care and Education Training Module)
  • 1 सितंबर, 2017 को ही केंद्रीय महिला एव बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशिक्षण मॉड्यूल भी जारी किया। जिसका नाम ‘प्रारंभिक बचपन की देखभाल और शिक्षा प्रशिक्षण मॉड्यूल’ (ECCE-Early Childhood Care and Education Training Module) है।
  • प्रशिक्षण मॉड्यूल को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ECCE पाठ्यक्रम और शैक्षिक दृष्टिकोण की बुनियादी समझ प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे कि बच्चों का इष्टतम और समग्र विकास किया जा सके ताकि वे छः वर्ष की अवस्था में औपचारिक विद्यालय शुरू करने के लिए तैयार हो जाएं।
  • इसमें तीन वर्ष से कम उम्र के बच्चों के मनोवैज्ञानिक सामाजिक विकास (Psycho Social Development) पर एक घटक भी शामिल किया गया है।
  • इस अवसर पर ICDS प्रशिक्षण मॉड्यूल और ई-ट्रेनिंग मॉड्यूल भी जारी किया गया। इसका लक्ष्य ICDS कार्यक्रम के सेवा प्रदाता तंत्र में सुधार और बेहतर कार्यक्रम परिणाम में तेजी लाना है।
  • निष्कर्ष
    केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जारी योजना को और आकर्षक एवं प्रभावी बनाने हेतु नए नाम ‘प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना’ के नाम से पुनः शुरू किया गया। इसके माध्यम से गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं तथा बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण की स्थिति में सुधार लाने के साथ ही जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत में प्रत्येक तीसरी महिला कुपोषित और प्रत्येक दूसरी महिला रक्ताल्पता से पीड़ित है। जिसके कारण उन्हें तथा उनके बच्चों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना इन समस्याओं के समाधान हेतु कारगर सिद्ध होगी।

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