गूगल द्वारा भारत में बाढ़ चेतावनी सूचना तंत्र का शुभारंभ

गूगल द्वारा भारत में बाढ़ चेतावनी सूचना तंत्र का शुभारंभ

देश का एक बड़ा हिस्सा नियमित रूप से बाढ़ग्रस्त रहता है। भारत दुनिया के उच्च बाढ़ प्रवण देशों में से एक है। भारत के 23 राज्य बाढ़ की दृष्टि से अति संवेदनशील हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से देश की लगभग 40 लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़-संवेदनशील है, जिसमें से लाख हेक्टेयर भूमि प्रत्येक वर्ष बाढ़ से प्रभावित होती है। भारत की सभी नदी घाटियां बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील हैं। प्रत्येक वर्ष बाढ़ के कारण जन-धन की अपार क्षति होती है। लक्षणों को परख कर यदि बाढ़ की पूर्व सूचना समय रहते दिए जाने की समुचित व्यवस्था हो तो जन-धन के नुकसान से बचाव संभव है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा भारत के विभिन्न बाढ़ क्षेत्रों में पूर्वानुमान के वैज्ञानिक प्रबंध किए गए हैं। आपदा प्रबंधन में सूचना तकनीक के प्रयोग से आपदाओं की पूर्व चेतावनी की सटीकता बढ़ जाती है। इसी परिप्रेक्ष्य में गूगल द्वारा भारत में बाढ़  चेतावनी सूचना तंत्र का शुभारंभ किया गया है।

  •  फरवरी, 2016 में गूगल द्वारा भारत में बाढ़ चेतावनी सूचना तंत्र का शुभारंभ किया गया।
  •  गूगल द्वारा प्रारंभ इस सुविधा को गूगल वेब सर्च, गूगल नाउ कार्ड्स (Now Cards), गूगल मैप और गूगल पब्लिक एलर्ट होमपेज से प्राप्त किया जा सकता है।
  •  इस तंत्र के माध्यम से लगभग 170 से अधिक क्षेत्रों के लिए नदी जल स्तर एवं बाढ़ की पूर्व चेतावनी प्रदान की जा सकती है।
  •  केंद्रीय जल आयोग द्वारा प्राप्त आंकड़ों के आधार पर बाढ़  की चेतावनी जारी की जाएगी।
  •  ज्ञातव्य है कि बाढ़ की समस्या को राष्ट्रीय स्तर पर सुलझाने के लिए वर्ष 1954 में बाढ़ नियंत्रण कार्यक्रम बनाया गया।
  •  रेड्डी समिति की सिफारिश पर सर्वप्रथम दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ की भविष्यवाणी के लिए वर्ष 1958 में बाढ़ पूर्वानुमान इकाई की स्थापना की गई।
  •  वर्तमान में कुल 175 बाढ़ पूर्वानुमान केंद्र कार्यरत हैं।
  •  वर्ष 1976 में बाढ़ से निपटने के लिए राष्ट्रीय बाढ़ आयोग की स्थापना की गई।
  •  गूगल द्वारा वर्ष 2015 में चक्रवात से संबंधित पूर्वानुमान के लिए भी चक्रवात चेतावनी सूचना तंत्र का शुभारंभ किया था।
  •   बाढ़ की चेतावनी के लिए विभिन्न नदी बेसिनों में जल-प्रवाह मापी यंत्रों को लगाया गया है।
  •   उत्तर भारत तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के बाढ़ वाले इलाकों के लिए वर्ष 1972 में गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग की स्थापना की गई है। इसका   मुख्या

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